MAA YE MERA JAHAN
मां ये हि मेरा जहां
मां को शब्दों में बांध पाना असंभव है वह ममता का वो सागर है जिसमें भावनाएं हिलोरे लेती रहती हैं इसलिए तो कहा गया है कि अगर ईश्वर को देखना है तो मां को देख लेना चाहिए।
मां और बच्चे का रिश्ता बेहद खास होता है जीवनभर आपकी मां जो आपके लिए करती है उसके कर्ज को कभी चुकाया नहीं जा सकता
मां से हर बच्चे का रिश्ता दुनिया के किसी भी रिश्ते से पुराना होता है क्योंकि मां और बच्चे का जुड़ाव गर्भ में ही हो जाता है तभी से मां को बच्चे की फिक्र सताने लगती है और बच्चा भी मां के अहसासों को समझने लगता है जीवनभर मां अपने बच्चे के सबसे करीब रहती है उसकी एक खुशी के लिए अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाती हैण् मां बच्चे का सिर्फ पालन ही नहीं करती बल्कि उसके अंदर संस्कारों का बीज बोने में भी सबसे अहम रोल एक मां का ही होता है मां के निस्वार्थ प्रेम और त्याग का आभार प्रकट करने के लिए एक पुस्तक
मां ये हि मेरा जहां
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